कवि मन चाहे कविता बेहतर हो 'आज' कल से और 'कल' आज से, नए आयाम जुड़े ,शब्दो से खेलूं, वर्णमालाओं में गोते लगाऊँ, परख कर रचु नित दिन ,मानव जीवन के गीत,जो बेहतर हो कल 'आज'से|